मंगलवार, दिसंबर 27, 2011


4 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिय कोमल जी,
    यथायोग्य अभिवादन्।
    बेहतरीन प्रस्तुति, कुछ शब्द भी होते तो........?
    धन्यवाद शताब्दी बाद ब्लॉग पर आने के लिये।
    - बाबुल

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  2. मेरे कदमों की रफ्तार मुझे यह यकीन भी दिलाती है? भविष्य में मेरी हथेली से कुछ छूटेगा, क्या छूटेगा कह नहीं सकती, बहुत कुछ मिलेगा यह यकीन है। ... सो लिखती रहती हूं ... कभी भीड़ में तो कभी तन्हा ...
    bahut badiya sakaratmak soch..
    bus yahi soch kar apna karm har insaan ko karte rahna chahiyen.. geeta ke.. karmnevadikarasti maa faleshu kadachan' ke tarj par..
    bahut badiya laga aapke blog par aakar..
    Haardik shubhkamnayen!!
    NAVVARSH kee haardik shubhkamna sahit.

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